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बार-बार तुम सोच रही हो
मन में कौन सी बात, मन में कौन सी बात
बार-बार तुम सोच रही हो
मन में कौन सी बात, मन में कौन सी बात
चार दिनों की चाँदनी हो
चार दिनों की चाँदनी हे फिर अंधियारी रात
फिर अंधियारी रात
चार दिनों की चाँदनी हे
आज तुम्हारे चेहरे की रंगत बोलो क्यों बदली है
मुझे भी खुद मालूम नहीं
कि मेरी कश्ती किधर चली है
मुझे भी खुद मालूम नहीं
कि मेरी कश्ती किधर चली है
दूर ओ देखो झिल-मिल झिल-मिल
चमक रही है अपनी मंज़िल
उस मंज़िल की ओर सजनीया
चलो चले एक साथ
चार दिनों की चाँदनी हे फिर अंधियारी रात
फिर अंधियारी रात
चार दिनों की चाँदनी हे
कितना है आसान जगत में मन के महल बनाना
पर कितना मुश्किल है अपने हाथ से उन्हें गिराना
कितना है आसान जगत में मन के महल बनाना
पहले एक धुंधली सी आशा, फिर मजबूरी और निराशा
प्रेम के पथ पर हर प्रेमी को मिली यही सौगात
प्रेम के पथ पर हर प्रेमी को मिली यही सौगात
चार दिनों की चाँदनी हे फिर अंधियारी रात
फिर अंधियारी रात
चार दिनों की चाँदनी हे